Friday, December 4, 2009

उसकी शान में !!

खुदा की नेमतों* का जवाब है कोई,
तुम हकीकत हो या फिर, ख्वाब है कोई !

कहता हूँ मैं तुमको, अच्छाईयों का पारस,
छु दो बस तुम उसको, गर ख़राब है कोई !

आज़ाद हूँ ग़मों की काल कोठरी से मैं,
ज़िन्दगी है रोशन, आफताब** है कोई !

कर लूँगा मैं नशा भी, अगर मुझे बता दो,
तुम्हारे अहसास से नशीली, शराब है कोई !

शर्त लगाता हूँ, तुम ढूंढ के बता दो,
तुमसा ज़माने में, गर जनाब है कोई !

घूमा नहीं हूँ दुनिया ऐसा नहीं है "साबिर",
पाया नहीं है तुमसा, लाजवाब है कोई !


(*कृपा, **सूरज)

9 comments:

  1. अच्छी रचना। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

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  2. thx to all for nice words and encouragement......

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  3. आपके लब्ज़ों ने मदहोश कर दिया
    गज़ल है या फ़िर शराब है कोइ ....! बधाई जनाब ..!

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  4. उम्दा शेर , बेहतरीन गज़ल
    हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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  5. Sabse pratham aapka profile bada achha laga...! Rachna oghvate aur laybaddh hai!
    Blogjagatme swahat hai!

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